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इन दिनों नोटबंदी से भी बुरे हुए हालात, क्यों आरबीआई नहीं दे रहा बैंको को धेला


सन्तोष कुशवाहा
बांदा। इन दिनों नोट बंदी से भी खराब हालत हो गये हैं, बैंको में कैश की किल्लत नें गेहूं बेंचने वाले किसानों और शादी करने वाले लोगों के सामने बहुत बड़ा संकट खड़ कर दिया है। पिछले दो मांह से रिजर्व बैंक आफ इंड़िया नें जनपद के बैंकों को करेंसी का एक धेला नहीं दे रही है।
कैश देने से हांथ खडे कर दिया है। सहालग शादी ब्याह के मौसम में बैंकों से नगदी न मिलने पर शादियां प्रभावित हो रही हैं। किसानों को सरकारी गेहूं खरीद केन्द्रों में गेहूं बेचने की कीमत नहीं मिल रही है। किसान चेक लिए कैश के लिए घूम रहे हैं।

100 और 500 की पुराने नोटबंदी से हालात बेहद पेचीदा हो गये थे। प्रदेश में विधान सभा चुनाव घोषित होते ही कई महीने बाद आरबीआई से करेंसी मिलने पर बैंक के खाता धारकों को जैसे राहत मिली कि चुनाव सम्पन्न होते ही एक मांह के बाद फिर वही हालात उत्पन्न हो गये हैं। कैश की जबरजस्त किल्त से बैंक के खाता धारकों को सहालक में भारी परेशानी उठानी पड रही है। बैंको में जमा अपना पैसा भी खाता धारक नहीं निकाल पा रहे हैं।

आर0के0 सिंह क्षेत्रीय प्रबंधक(आरएम) भारतीय स्टेट बैंक नें बताया कि पिछले 65 दिनो से रिजर्व बैंक आफ इंडिया नें स्टेट बैंक को कोई भी करेंसी नहीं मिल रही है। जिससे हमारे बैंक की शाखाएं अपने उपभोक्ताओं को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। ब्राच में जमा हो रहे रोजाना 20 लाख रुपयों में ही काम चलाया जा रहा है। जबकि चेस्ट ब्रांच को रोजाना 5 करोड़ की जरूरत पड़ती है। आरबीआई और डीएम को कई पत्र भेजे मगर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

जिला अग्रणी बैंक के प्रबंधक (एलडीएम) जे0के0 ढींगरा नें कहा करेंसी संकट से बैंकों में काफी दिक्तें हो रही हैं। उन्होनें कहा कि बडी संख्या में गेहूं खरीद केन्द्रों में गेहूं बेंचने वाले किसानों को करेंसी के अभाव में उलका भुगतान नहीं हो पउ रहा है।

शादी ब्याह वालों को भी मांग के अनुरूप करेंसी नहीं दी जा रही है। इस बारे में आरबीआई और जिलाधिकारी व इलाहाबाद बैंक के जोनल हेड़ हमीरपुर को भी अवगत राया गया है।

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