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योगी सरकार या ढोंगी सरकार


फरमान अब्बासी
योगी सरकार को ढोंगी सरकार कहना कोई गलत बात नही बल्कि इसमें सौ फीसदी सच्चाई है, क्योकि चुनाव के दौरान भाजपाइयों ने सपा सरकार को क़ानून व्यवस्था दुरुस्त न होने पर घेर रखा था और भाजपा के पास यूपी विधान सभा चुनाव में कानून व्यवस्था के अलावा अन्य कोई मुद्दा भी नही था क्योकि अखिलेश के नेतृत्व में बेशुमार योजनाये लागू और विकास कार्य हुए है। इसलिए भाजपा ने सिर्फ क़ानून व्यवस्था पर सवालिया निशान उठा रखे थे।
सत्ता में आने के बाद भाजपा के लिए यही क़ानून व्यवस्था व कानून का राज़ प्रदेश में कायम करना  साँप के बिल में हाथ देने जैसा साबित हो रहा। मथुरा सर्राफा व्यापारियो की हत्या हो या फिर सहारनपुर प्रकरण या फिर कही और लगातार एक के बाद एक अपराध होते जा रहे है। जो योगी सरकार के खोखले वादों की पोल खोलने के लिए काफी है।
पीएम करे नोटबन्दी तो सीएम ने कर दी गोस्त बन्दी। लेकिन अगर गौर किया जाये तो दोनों के फैसले से नुक्सान जनता का ही हुआ है मगर प्रदेश में विकास या जनता का कल्याण कही भी नज़र नही आया। नज़र आई तो भुखमरी, लाचारी,
आखिर क्या वजह है कि जो पार्टी क़ानून व्यवस्था को लेकर पिछली सरकार को कोसा करती थी उसी के राज में कानून व्यवस्था लचर साबित हो रही है। कही ऐसा तो नही है कि भाजपा सत्ता में आने के लिए कोई भी हद पार कर सकती है। इस बात का अंदाज़ा प्रधानमन्त्री के लोकसभा चुनाव के दौरान बोले गए पत्नी न होने के झूठ से लगाया जा सकता है।
(ये लेखक के निजी विचार हैं, UP Live News की सहमति आवश्यक नही है)

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